विंबलडन महिला फाइनल में चेक गणराज्य की दो खिलाड़ियों की टक्कर तय

लंदन
 विंबलडन में महिला सिंगल्स का इस बार का फाइनल ‘ऑल-चेक’ फाइनल के तौर पर पक्का हो गया है, क्योंकि गुरुवार को इसके दोनों ही सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की खिलाड़ी अपनी प्रतिद्वंदियों पर भारी पड़ीं और चार साल में तीसरी बार विंबलडन में चेक गणराज्य की महिला खिलाड़ी के ट्रॉफी उठाना फाइनल से पहले ही सुनिश्चित कर दिया।

पहले सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की कैरोलिना मुकोवा ने एक मैच प्वाइंट बचाते हुए अमेरिकी खिलाड़ी कोको गफ को 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) हराकर पहली बार विंबलडन के फाइनल में जगह बनाई और गफ का विंबलडन जीतने का सपना तोड़ दिया। वहीं इसके बाद हुए दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की ही लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्टा कोस्त्युक पर 6-4, 6-4 एकतरफा जीत दर्ज करते हुए ऑल-चेक महिला ग्रैंड स्लैम फाइनल पर मुहर लगा दी।

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गफ ने दी टक्कर
सबसे पहले कैरोलिना मुकोवा ने इस साल के विंबलडन में कोको गफ के मुश्किल हालात से उबरकर आगे बढ़ने के शानदार सफर को गुरुवार को रोक दिया। इससे 2025 की फ्रेंच और 2023 की यूएस ओपन चैंपियन गफ का विंबलडन में पहली बार ट्रॉफी उठाने का इंतजार फिर बढ़ा दिया। हालांकि, इस जीत के लिए मुकोवा को तीसरे सेट में रोमांचक टाई ब्रेक से जूझना पड़ा। वह 4-1 से आगे थीं और फिर बढ़त को 6-3 तक ले गईं, लेकिन इसके बाद गफ ने उम्मीद के उलट सबसे पहले मैच प्वाइंट हासिल कर लिया।

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मुकोवा के साथ मुकाबले में गफ टाई-ब्रेक में 9-8 से आगे हो गईं और मैच प्वाइंट पर थीं लेकिन गफ ने एक फोरहैंड शॉट नेट में मार दिया, जिससे दर्शक हैरान रह गए।

मुकोवा ने घास से एलर्जी और गर्मी को भी दी मात
किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि मुकोवा को घास से एलर्जी है और टेनिस के सबसे मशहूर ग्रास कोर्ट पर कदम रखने के लिए ही उन्हें बहुत सारी गोलियां, स्प्रे और आई-ड्रॉप्स की जरूरत पड़ती है। ऐसे में भी कोर्ट पर भीषण गर्मी में जहां दर्शक परेशान हो रहे थे, वहीं मुकोवा का खेलने का शानदार और विविध अंदाज में चमक रहा था।

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21 वर्षीय नोस्कोवा को मिली आसान जीत
वहीं नौवीं वरीयता प्राप्त चेक गणराज्य की नोस्कोवा को अपना पहला ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल खेलने के बावजूद हमवतन मुकोवा के सेमीफाइनल मुकाबले की तरह अधिक संघर्ष नहीं करना पड़ा। वह पूरे समय शांत और संयमित दिखीं। उन्होंने अपनी भावनाएं तभी जाहिर कीं जब कोस्त्युक ने दूसरे मैच प्वाइंट पर फोरहैंड शॉट को कोर्ट के किनारे की रेखा के बाहर मार दिया। जीत के बाद नोस्कोवा ने कहा कि ग्रैंड स्लैम में सेमीफाइनल कभी आसान नहीं होता, लेकिन मैंने बस जितना हो सके धैर्य रखने, शांत रहने और किसी तरह आखिरी प्वाइंट जीतने की कोशिश की।

 

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